गुनगुनी सी मखमली सी
याद तेरी
छेड़ जाती है
अकेले में कभी
तो रात भर फिर जागता हूँ
सोचता हूँ मैं तुम्हे क्या याद हूँगा
साथ जो लम्हे बिताये
वो तुम्हे क्या याद होंगे
याद होगी क्या तुम्हे मेरी वो पहली प्रेम पाती
शाम की वो मस्तियाँ सुबहों के वो मीठे तराने याद होंगे
याद होगा क्या तुम्हे
कंधे से मेरे सिर टिकाना
रूठना और मान जाना
मुस्करा कर फिर मुझे ग़ालिब की वो ग़ज़लें सुनाना
याद होगा
सोचता हूँ रात भर और जागता हूँ
गुनगुनी सी मखमली सी
याद तेरी
छेड़ जाती है
अकेले में कभी
तो रात भर फिर जागता हूँ
याद तेरी
छेड़ जाती है
अकेले में कभी
तो रात भर फिर जागता हूँ
सोचता हूँ मैं तुम्हे क्या याद हूँगा
साथ जो लम्हे बिताये
वो तुम्हे क्या याद होंगे
याद होगी क्या तुम्हे मेरी वो पहली प्रेम पाती
शाम की वो मस्तियाँ सुबहों के वो मीठे तराने याद होंगे
याद होगा क्या तुम्हे
कंधे से मेरे सिर टिकाना
रूठना और मान जाना
मुस्करा कर फिर मुझे ग़ालिब की वो ग़ज़लें सुनाना
याद होगा
सोचता हूँ रात भर और जागता हूँ
गुनगुनी सी मखमली सी
याद तेरी
छेड़ जाती है
अकेले में कभी
तो रात भर फिर जागता हूँ

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