गुरुवार, 27 मई 2021

गोली चल गई ठाँय

 महफ़िल जमी हुई थी । पूरे गाँव के ठलुओं का एक ही ठिकाना तेज की नीम ।

काए दद्दा तुमने तो चीन से बासठ की  की लड़ाई लड़ी है ।

दद्दा मुस्कराए , मूछों पे हाथ फेरा , -"हम चीन की सीमा पर थे । शाम का बखत था । हम ने दूरबीन से देखा सामने दुश्मन का तंबू लगा हुआ था ।दुश्मन और हम आमने सामने , बो  हमे देखता हम बिसे   एक दिन हमने तय कर लई की आज इनके कमांडर से दो दो हाथ होई जायँ।"

----फिर ..

"फिर क्या हम अकेले ही चल दिये दुश्मन के तंम्बू की तरफ 

सामने डेढ़ फुटिया चीनी उसने हमें आते देखा तो सकपका गया , कि जे तो इधर ही आ रहा है । बिस्ने अपनी बंदूक हमाए सामने कर के कहा '  थम कौन है'

हमने कहा जाओ अपने 2 फुटिये कमांडर से कह दो हवलदार बेंचे सिंह आएँ हैं

वो बोला नही जाने देंगे

हमने कहा कौन रोकेगा हमे

विसने कहा हमाई बंदूक और विसमे से निकली गोली

हमने कही चला गोली 

गोली चली...  ठांय...

----गोली चला दी 

---हाँ चला दी  ठांय$$$

लेकिन गोली बंदूक की नली से निकर के हमाए पास तक आती इस से पहले हमने नली के मुँह पर अपने हाथ का पंजा लगा दिया ।

---"  फिर "

--फिर क्या गोली नली के मुहाने पर आकर पंजे से टकराई और वापस मुड़ के फिर अंदर वहाँ से फिर नली के मुँह पर और फिर पंजे से टकरा कर फिर अंदर ।गोली की समझ न आये की निकलें कहा से वहीं नली में गन्न गन्न करके फिस्स हो गयी ।

संतरी ने जब जे देखा कि गोली बंदूक बेकार ,तो भाग गया और अपने कमांडर को जा कर बताया ।

कमांडर सुनते ही बोला ओह ये जरूर हवलदार बेंचे सिंह ही होगा उसके अलावा इतना दिलावर कोई नही 

-- दाऊ तुम ने कैसे समझा कि जे कमांडर जे बोल रहा है , तुम चीनी भाषा जानते हो ?

दाऊ कुछ बोले इस से पहले रामपित्ताप बोल पड़े "" जे चीनी का , बेसन ,सूजी औ नोन तेल धना सब जान्त हैं।

वहाँ मेस में ले कलछुला खाना बनाती रहीं , जहां बताय रहीं लड़ाई लड़ीं ..।

हम से सुनो इनके किस्सा ।

हवलदार साब खिसिया गए, और ठलुआ एक नया किस्सा सुनने में लग गए ।


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