शुक्रवार, 21 मई 2021

कुछ भी न हो ज़िंदगी मे फिर भी चाय होती है

 जो वक़्त के साथ बदल जाए वह  राय होती है ,

कुछ भी न हो ज़िंदगी मे फिर भी चाय होती है


चाय उत्सव भी है बेफिक्री भी और सुस्ती उदासी भागने का जरिया भी। दोस्तों के साथ चाय के खनखनाते प्याले उत्सव का आभाष भी हैं और ज़िंदगी की भागदौड़ का अहसास भी ।फीकी चाय भी स्वाद देती है जब बैठा हो कि मेज के उस पार कोई बेहद प्यारा और कभी कभी अकेले बैठ चाय के प्याले से निकलते धुएं में खुद को ढूंढना इतना भी बुरा नही होता ।

 शहर  का मिजाज जानना हो तो नुक्कड़ की चाय की दुकान से अच्छा कुछ भी नही । 

और अगर बिहार और गुजरात में है तो पीने को चाय के अलावा मजेदार और असरदार कुछ भी नही ।

चाय की महिमा अनंत है आप घर मे हों या सफर में  चाय होती है । सुबह की हगन चाय (बेड टी) से लेकर शाम की मगन चाय होती है  । रेल में बढ़िया से लेकर सबसे खराब और  रामप्यारी से लेकर सिया दुलारी चाय होती है ।कश्मीर से कन्याकुमारी कहीं भी जाइए रेल के हर स्टेशन  पर जो आवाज सबसे पहले आती है वह चाय और चायवाले की  होती है । अब तो राजनीति में भी चाय वाले का ही बोलबाला है  ।और उसके सामने कौन कुछ कहने वाला है। 

बहरहाल

इस दुनिया के कुत्तेपन में 

एक हमदर्द निराली है 

जीवन में  सिरदर्द हैं लाखों 

सुकूं चाय की प्याली है ।


#अंतराष्ट्रीयचायदिवस  पर हार्दिक शुभकामनाएं

चाय पियो मस्त जियो


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