छठवीं में पढ़ती है गायत्री। पढ़ने में अच्छी है ,खोखो भी खेलती है बहुत अच्छा। पिछलीबार जिले कीटीम में गयी थी और कानपुर हुए खेल प्रतियोगिताएं में जीत भी दिलाई थी इसने अपनी टीम को। इधर कुछ दिनों से गुमसुम सी रहती है। गणित के सवाल गलत हो जाते हैं। मैडम डाँटती है ,समझाती हैं फिर गलत , मन नही लगता उसका। अब खेलती भी नहीं। खेल के घंटे में जब लड़कियाँ खो खो खेलती हैं वो चुपचाप बैठी रहती है।
पिता अस्पताल से अब घर आ गया है गायत्री का। दोनों पैर काट दिए गए हैं उसके। पिछले दिनों एक्सीडेंट हो गया था। टेम्पो चलाया करता था। गायत्री की माँ प्यार से भी समझाती थी और झगड़ा भी खूब करती थी उसके पिता से की वो दारू की आदत छोड़ दे। गायत्री भी पिता से अक्सर रूठ जाती जब वो दारू पीकर घर आता था। कहती थी बात नही करेगी बदबू आती है मुह से दारू की।एक दिन दारू के नशे में टेम्पो समेत खड्ड में चला गया गायत्री का पिता,, बुरी तरह ज़ख़्मी हुआ था। उसके दोनों पैर काटने पड़े। अब दिन भर घर में पड़ा रहता है। गायत्री की माँ रो रो कर अपने भाग्य को कोसती रहती है। गायत्री का एक बड़ा भाई है राहुल, दसवीं में पढता था . पढ़ने लिखने में बहुत होसियार हैगायत्री को रोज गणित के सवाल हल करने की नयी तकनीकें बताता था और चुटकियों में सवाल हल हो जाते थे अंग्रेजी में बात करना सिखाता था वो गायत्री को , पर अब आगे की पढ़ाई शायद नही कर पायेगा। घर का खर्चचलाने के लिए सुखविंदर सिंह के ट्रक पर क्लीनर काकाम करने लगा है. कुछ दिनों में ड्राइवर हो जाएगा।
गायत्री अब क्लास में शोर भी नहीं मचाती। पहले कहा करती थी पढ़ लिख कर पुलिस में दरोगा बनेगी और सब को परेड करवाएगी ,तेज चल कह कर खूब हंसती थी। अब नहीं हँसती।
एक दिन जब मैडम ने प्यार से बहुत देर तक गायत्री से उसकेगुम सुम रहने का कारण पूछा तो गायत्री रो पड़ी और सुबकते बोली "मेरी आगे की पढाई कैसे होगी? "
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