बैताल कथा
बेताल ने विक्रम के कंधे पर लदे लदे पूरा किस्सा सुनाया की विक्रम हुकूमत ने
राजधानी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए दूर बुंदेलखंड में खटारा वाहन भेजने का
फैसला किया है और इस फैसले की देवताओं ने साधु साधु कह कर प्रशंसा की है।
बुंदेलों से कहा गया कि वे इन वाहनों का पुष्प वर्षा और दुंदुभि बजा कर स्वागत
करें । परंतु कुछ लोग कहने लगे कि यह तो अन्याय है ऐसा नही किया जाना चाहिए
।बुंदेलों को भी स्वच्छ हवा का हक़ है ।
तो मियाँ विक्रम अब तुम इस प्रश्न काउत्तर दो की कौन सही है ?यदि तुमने जानते हुए उत्तर न दिया तो तुम्हारे सिर के टुकड़े हो जाएंगे ।
विक्रम बोले सुन बेताल दोनों ही अपनी अपनी जगह सही हैं .ऐसा हमेशा से होता रहा
है ।बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश के लिए वैसे ही है जैसे विकसित देशों के लिए
अविकसित और विकास शील देश है जिस तरह इनका कल्याण करने के लिए तमाम दावे
किये जाते हैं और अपना समस्त कचरा अंकल टॉम उसी या उस जैसे देशों को देता
रहता है उसी तरह बुंदेलखंड के लिए कई पैकेज दिए जाते रहे हैं यह भी नई तरह का
पैकेज है ।योगी अंकल की अफसरशाही के पास अविकसित बुंदेलखंड के लिए क्या किया
जाए इसे जानने की एक सुदीर्घ परंपरा है और वे यह सब पढ़ लिख कर आते हैं ऐसे ही
कोई अफसर हो जाता है क्या ।और जो यह कह रहे हैं कि यह गलत है वो भी
सैद्धान्तिक रूप से सही हैं उन्होंने दिनकर को पढ़ा था दिल्ली में रौशनी शेष
भारत मे अंधियारा है पर यह सिर्फ सैद्धान्तिक रूप से ही सही है और सिद्धांत का
अचार भी नही डलता अगर वे व्यवहार में 'बोल दिल्ली तू क्या कहती है?' नही पूछ
पाते हैं तो उन्हें गलत कहने का कोई हक नही वे खटारा बसों में ही घूमे । अगर
यह प्रश्न दमदारी से पूछा गया तो वो लोग सही हो जाएंगे जो यह कह रहे हैं कि यह
गलत कर रही है सरकार और यदि दमदारी से पूछने का हौसला न दिखा पाए तो फिर वो
अफसर बिल्कुल सही होंगे जिन्होंने दिल्ली का कचरा बुंदेलखंड में फेंक दिया है
और राजधानी को प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाने के लिए पुरुस्कृत भी होंगे ।
इतना सुनते ही बेताल वापस डाल पर जा कर बैठ गया और कौन सही है यह जानने की
प्रतीक्षा करने
लगा ।





