रविवार, 3 मई 2020

 काए मंगरू कैसी कट रही

का बतलायें दद्दा अब तो खाबे के ऊ लाले पड़ रहे
 राशन पानी खत्म हो गाओ बैठे बैठे पाँव उखड़ रहे
 मन्स मंजूरी बन्द हो गयी, धंदा सबरे बन्द हो गए
पहले कछु तो मिलइ जात तो अब तो मूसरचन्द हो गए
कैसे कटें विपद के जे दिन
हिम्मत नहीं डटाएँ डट रही

 हम जानत है कैसे कट रही

हडबडाय के लोचन भैया घर के लाने पायन चल भए
 हर नाके पे डंडा खाए करे निहोरे आगे बढ़ गए
धूप घाम में चलत रहे फिर संझा भई ओ सूरज ढल गओ
घर तक पहोंच नहीं पाए उनके ऊपर तें टिरक निकर गओ
 उनके बच्चन की सूरत
आँखिन के आगे सें नही हट रही

हम जानत हैं कैसे कट रही

 कल आए थे चार जने , बोले तुम बिल्कुल मत घबरइयो 
 हम दे रहे पूड़ी के पैकेट खुद खइयो और सबे खवईओ
 हाथ मे धर के पैकेट उनने जाने कितने फोटू खींचे   
 पैकेट पकड़त सरम तो आई खड़े रहे आँखिन को मीचे
 सुनी है उनकी बोई सेल्फी
फेसबुकन पे बहुतई हिट रही
हम जानत हैं कैसी कट रही ।

----------राम जनम

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