खैर हम बात कर रहे थे वराह मिहिर की वराह मिहिर का जन्म उज्जैन के समीप 'कपिथा गाँव' में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पिता आदित्यदास सूर्य के उपासक थे। उन्होंने मिहिर को (मिहिर का अर्थ सूर्य) भविष्य शास्त्र पढ़ाया था। मिहिर ने राजा विक्रमादित्य के पुत्र की मृत्यु 18 वर्ष की आयु में होगी, यह भविष्यवाणी की थी। हर प्रकार की सावधानी रखने के बाद भी मिहिर द्वारा बताये गये दिन को ही राजकुमार की मृत्यु हो गयी। राजा ने मिहिर को बुला कर कहा, 'मैं हारा, आप जीते'। मिहिर ने नम्रता से उत्तर दिया, 'महाराज, वास्तव में मैं तो नहीं 'खगोल शास्त्र' के 'भविष्य शास्त्र' का विज्ञान जीता है'। महाराज ने मिहिर को मगध देश का सर्वोच्च सम्मान वराह प्रदान किया और उसी दिन से मिहिर वराह मिहिर के नाम से जाने जाने लगे। भविष्य शास्त्र और खगोल विद्या में उनके द्वारा किए गये योगदान के कारण राजा विक्रमादित्य द्वितीय ने वराह मिहिर को अपने दरबार के नौ रत्नों में स्थान दिया।
वराह मिहिर की मुलाक़ात 'आर्यभट' के साथ हुई। इस मुलाक़ात का यह प्रभाव पड़ा कि वे आजीवन खगोलशास्त्री बने रहे। आर्यभट वराहमिहिर के गुरु थे, ऐसा भी उल्लेख मिलता है। आर्यभट की तरह वराह मिहिर का भी कहना था कि पृथ्वी गोल है।ये तब की बात है जब यूरोप में लोग नंगे जंगलों में घूम करते थे और अर्धमानव से ज्यादा कहलाने योग्य न थे । 17 वीं सदी में जब गैलीलियो ने कहा था कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है तब उसे दंडित किया गया था और उसके कथ्य को अवैज्ञानिक मानते थे गोरे ।और न्यूटन से सदियों पहले वराह मिहिर ने गउरुत्वाकर्षण बल के विषय मे बताया था । उन्होंने कहा था कि सभी वस्तुओं का पृथ्वी की ओर आकर्षित होना किसी अज्ञात बल का आभारी है।
उन्हें विशेष रूप से यह जानना चाहिए जो समस्त ज्ञान के लिए पश्चिम की ओर देखते हैं और मानते हैं कि अगर अंग्रेज़ी मीडियम स्कूल न होते तो उनके बच्चों का जीवन अधूरा रह जाता ये तो अंग्रेज़ थे जिन्होंने हमे तमीज़ और तहज़ीब सिखाई ।
खैर हमे अपने इतिहास और ऐतिहासिक स्थलों के विषय मे जानने के लिए घर से निकलना पड़ेगा ।पुराने ग्रंथों और स्मृतियों का अध्यन करना पड़ेगा । अंग्रेज़ी के अलावा अन्य भरिय भाषाओं का अध्यन करना पड़ेगा क्योंकि भारत का ज्ञान और संस्कृति का आधार भाषाएं है ,भारतीय दंत कथाओं और प्रचलित किस्सों का तार्किक विश्लेषण करना पड़ेगा शायद हम तभी अतुल्य भारत को जान पाएंगे ।




