रविवार, 1 दिसंबर 2013

दोस्त मेरे 
जानता हूँ 
साथ तुम न दे सकोगे
ये सफ़र मेरा है 
और मैं ही 
इसको तय करूंगा 
चाह कर भी मैं 
बदल पाउँगा न ये रास्ता 
और तुम भी 
रख न पाओगे क़दम 
मेरे कँटीले रास्ते पर 
फिर भी 
मन ये चाहता है 
साथ दो तुम 
हाथ दो तुम 
हाथ में मेरे 
मगर मैं जानता हूँ 
दोस्त मेरे 
ये सफ़र मेरा है 
और मैं ही 
इसको तय करूंगा 
दोस्त मेरे 
साथ तुम न दे सकोगे। 
 


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