शनिवार, 19 अक्टूबर 2013

मन बावरा



मन बावरा
सपने बुने
माने न किसी का कहा
कुछ ना सुने

सपने सुनहरे भोले
छूता जिन्हें ये हौले
कानो में मिश्री घोले 
जिनकी हंसी

बारिश की रिमझिम इनमे
गीतों की सरगम इनमे
इनमे रुपहली सी एक 
दुनिया बसी

निंदिया की गोदी में छुप
लोरी सुने
मन बावरा
सपने बुने

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