अपनी बात
शनिवार, 19 अक्टूबर 2013
मन बावरा
मन बावरा
सपने बुने
माने न किसी का कहा
कुछ ना सुने
सपने सुनहरे भोले
छूता जिन्हें ये हौले
कानो में मिश्री घोले
जिनकी हंसी
बारिश की रिमझिम इनमे
गीतों की सरगम इनमे
इनमे रुपहली सी एक
दुनिया बसी
निंदिया की गोदी में छुप
लोरी सुने
मन बावरा
सपने बुने
3 टिप्पणियां:
gyaneshwaari singh
27 अक्टूबर 2013 को 12:22 pm बजे
badhiya likha hai
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Ram janam
4 नवंबर 2013 को 11:16 pm बजे
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Ram janam
4 दिसंबर 2013 को 12:26 am बजे
shukriya
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badhiya likha hai
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
हटाएंshukriya
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