एक तरफ हम बात करते हैं की प्रत्येक बालक अपने आप में अनूठा है दूसरी तरफ सबका सामान्यीकरण कर के एक सिलेबस का निर्माण भी करते हैं और प्रयास कि बालक इस सिलेबस को पढ़े यह उस के लिए उपयोगी है। M L L भी बना लेते हैं की मियां इतना तो इसे आना ही चाहिए। मुझे लगता है यह बालक और उसकी स्वतंत्रता में दखलंदाज़ी है उसके मन मस्तिस्क को जबरिया मोल्ड करने का तरीका है।
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